संक्षेप में: Lp(a) कोलेस्ट्रॉल ले जाने वाला एक पार्टिकल है जो ज़्यादातर जेनेटिक (परिवार से मिला) होता है, और आम लिपिड प्रोफ़ाइल में अक्सर इसकी जाँच नहीं होती। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव गर्ग ने कहा कि यह टेस्ट हर किसी के लिए ज़रूरी नहीं, लेकिन जिन्हें कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ का ज़्यादा ख़तरा है, या जिनके परिवार में इसका मज़बूत इतिहास है, उन्हें यह करवाना चाहिए। जेनेटिक होने की वजह से इसे अक्सर ज़िंदगी में एक बार वाला टेस्ट कहा जाता है।
“मेरी लिपिड रिपोर्ट नॉर्मल है। फिर डॉक्टर एक और कोलेस्ट्रॉल टेस्ट की बात क्यों कर रहे हैं?”
अगर यह सवाल आपके मन में है, शायद माता-पिता के हार्ट अटैक या किसी रिश्तेदार की एंजियोप्लास्टी के बाद, तो आप अकेले नहीं हैं। आम लिपिड रिपोर्ट में LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स दिखते हैं। Lp(a) अक्सर उसमें नहीं होता, और कई भारतीय परिवारों ने यह नाम कभी सुना ही नहीं।
Lp(a) की बुनियादी जानकारी हम अपनी गाइड Lipoprotein(a): विरासत में मिला कोलेस्ट्रॉल जोखिम में दे चुके हैं। यह लेख उसके बाद के प्रैक्टिकल सवालों का जवाब देता है: क्या मुझे यह टेस्ट करवाना चाहिए, क्या यह सिर्फ़ एक बार करवाना है, और अगर बाक़ी नंबर ठीक हैं तो इसका क्या मतलब है?
कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और Lp(a) पर हमारे Dil Ke Doubts सेशन में, Heart Health India Foundation के फ़ाउंडर राम खंडेलवाल ने, जिन्हें ख़ुद 33 साल की उम्र में हार्ट अटैक हुआ था, ये सवाल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव गर्ग (सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और हार्ट फ़ेल्योर स्पेशलिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल्स, हैदराबाद; और कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (CSI) के EC सदस्य) से पूछे।
यह लेख Dil Ke Doubts Webinar 04 (10 सितंबर 2026) में पूछे गए सवालों और जवाबों पर आधारित है। यह Heart Health India Foundation की World Heart Month 2026 सीरीज़ का हिस्सा है, जो कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया और वर्ल्ड हार्ट फ़ेडरेशन के Don’t Miss a Beat कैंपेन के साथ आयोजित की गई।
उन्होंने जो बताया, वह आसान शब्दों में यहाँ है।
Lp(a) क्या है, और यह क्यों मायने रखता है?
डॉ. गर्ग ने बताया कि Lp(a) कोलेस्ट्रॉल ले जाने वाला पार्टिकल है जो ज़्यादातर जेनेटिक होता है, यानी परिवार में चलता है और बचपन से जेनेटिक रिस्क से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि ऊँचा Lp(a) दक्षिण-पूर्व एशियाई (South-East Asian) लोगों में एक बड़ा रिस्क फ़ैक्टर है, और इससे कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ का ख़तरा दो से तीन गुना हो सकता है। उन्होंने इसे स्ट्रोक और एऑर्टिक वाल्व की बीमारी से भी जोड़ा।
मोटे तौर पर उन्होंने बताया कि 30 mg/dL से कम नॉर्मल है, और 50 mg/dL से ज़्यादा को ऊँचा माना जाता है। अपनी रिपोर्ट का नंबर कैसे पढ़ें, यह अपने डॉक्टर से पूछें। उन्होंने कहा कि Lp(a) ऊँचा हो तो कार्डियोलॉजिस्ट से ज़रूर सलाह लें, भले ही अभी इलाज के विकल्प सीमित हैं।
क्या हर किसी को Lp(a) टेस्ट करवाना चाहिए?
नहीं, हर किसी को नहीं। उनके शब्दों में, “It need not be done for everyone.” यह उन लोगों में करवाना चाहिए जिन्हें कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ का ज़्यादा ख़तरा है, या जिनके परिवार में कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ का मज़बूत इतिहास है। उन्होंने यह भी बताया कि कार्डियोलॉजी की क्लिनिकल स्टडीज़ में इसे एक अतिरिक्त (accessory) टेस्ट के रूप में भी किया जाता है।
तो अगर आपके परिवार में दिल की बीमारी है, तो यह सवाल डॉक्टर से पूछना बिल्कुल ठीक है। लक्षण आने से पहले जाँच क्यों ज़रूरी है, यह हमारे लेख लक्षणों से पहले प्रिवेंटिव टेस्ट क्यों ज़रूरी हैं में पढ़ें।
Lp(a) को ज़िंदगी में एक बार वाला टेस्ट क्यों कहते हैं?
क्योंकि यह जेनेटिक है। डॉ. गर्ग ने समझाया कि जैसे ग़लत खान-पान से आम ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ सकते हैं, वैसा कोई लाइफ़स्टाइल “कारण” Lp(a) को नहीं बढ़ाता। उनके शब्दों में: Lp(a) का कोई causative factor नहीं है, “That’s why they say you should do it only once a lifetime”, यानी इसीलिए कहा जाता है कि यह टेस्ट ज़िंदगी में एक बार करवाना काफ़ी है।
अगर मेरा Lp(a) ऊँचा है, तो क्या मेरे बच्चों की भी जाँच होनी चाहिए?
राम ने यही सवाल पूछा। डॉ. गर्ग का जवाब: “Yes, definitely you can get it done”, यानी हाँ, परिवार की तस्वीर समझने के लिए बच्चों की जाँच ज़रूर करवाई जा सकती है, क्योंकि ऊँचा Lp(a) जेनेटिक रूप से आगे जाता है। एक व्यक्ति का एक टेस्ट पूरे परिवार के लिए ज़रूरी बातचीत शुरू कर सकता है।
“लेकिन मेरा LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स तो नॉर्मल हैं…”
यही वह सवाल है जिस पर बहुत लोग अटक जाते हैं। डॉ. गर्ग का जवाब साफ़ था: नहीं। ये आम नंबर नॉर्मल दिख सकते हैं, फिर भी कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ की जेनेटिक प्रवृत्ति (tendency) के कारण Lp(a) ऊँचा हो सकता है।
इसीलिए आम पैथोलॉजी लैब की रूटीन लिपिड प्रोफ़ाइल में Lp(a) नहीं आता। उन्होंने समझाया कि यह एक अलग पार्टिकल है, जैसे LDL के साथ एक अतिरिक्त प्रोटीन जुड़ा हो, इसलिए इसे अलग से लिखवाना पड़ता है। अपनी बाक़ी रिपोर्ट समझने के लिए पढ़ें: बैड कोलेस्ट्रॉल को कैसे हराएँ, और दिल की आम जाँचों के लिए: दिल की जाँचें समझें।
अगर दवाओं से Lp(a) ज़्यादा नहीं बदलता, तो मैं क्या कर सकता हूँ?
“इलाज सीमित है” सुनकर बेबसी महसूस हो सकती है। लेकिन डॉ. गर्ग ने बात वहीं नहीं छोड़ी।
- सख़्ती से हेल्दी लाइफ़स्टाइल। उन्होंने कहा कि ऊँचे Lp(a) वाले लोगों को उसी गंभीरता से लाइफ़स्टाइल सुधारनी चाहिए “as we do for coronary artery disease”, यानी जैसे कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ में करते हैं।
- आम उपायों से यह नंबर बदलने की उम्मीद न रखें। उन्होंने कहा कि आम दवाइयाँ, कॉफ़ी या तनाव Lp(a) को उस तरह नहीं बदलते जैसी मरीज़ उम्मीद करते हैं।
- नायसिन की दिक़्क़तें। विटामिन B3 (नायसिन) ही वह दवा थी जिसके असर की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने कहा कि इसके बहुत साइड इफ़ेक्ट्स हैं।
- स्टैटिन इसे बढ़ा भी सकते हैं। उन्होंने बताया कि स्टैटिन Lp(a) को लगभग 5–20% तक बढ़ा सकते हैं। यह कई लोगों को चौंकाता है, जो मानते हैं कि कोलेस्ट्रॉल की हर दवा हर नंबर घटाती है। कृपया इस वजह से अपनी कोई दवा ख़ुद से बंद न करें या न बदलें; अपने कार्डियोलॉजिस्ट से बात करें।
- नई दवाइयाँ अभी रिसर्च के स्तर पर हैं। उन्होंने एक जीन-साइलेंसिंग (एंटीसेंस) इंजेक्शन का ज़िक्र किया जो उम्मीद जगाता है, लेकिन कहा कि यह अभी बाज़ार में नहीं आया और Lp(a) का इलाज फ़िलहाल आम लोगों की पहुँच में नहीं है।
प्रैक्टिकल बात: अपना नंबर जानिए, परिवार के इतिहास को गंभीरता से लीजिए, और जो बातें आप बदल सकते हैं, उन पर डॉक्टर के साथ काम कीजिए। कोलेस्ट्रॉल के बारे में कई आम धारणाएँ सही नहीं होतीं, पढ़ें: कोलेस्ट्रॉल के मिथक जो दिल के मरीज़ों को नुकसान पहुँचाते हैं।
आगे आप क्या कर सकते हैं
- अगर परिवार में दिल की बीमारी का मज़बूत इतिहास है, या आपको ख़ुद कोरोनरी रिस्क ज़्यादा है, तो डॉक्टर से पूछिए: “क्या मुझे एक बार Lp(a) टेस्ट करवाना चाहिए?”
- “नॉर्मल” लिपिड प्रोफ़ाइल को Lp(a) का जवाब मत मानिए। यह आम तौर पर अलग टेस्ट है।
- अगर Lp(a) ऊँचा है, तो कार्डियोलॉजिस्ट से पूछिए कि आपके लिए लाइफ़स्टाइल और रिस्क कंट्रोल का क्या प्लान है, और क्या बच्चों या परिवार के बाक़ी लोगों की जाँच होनी चाहिए।
- इसे फ़ैमिली WhatsApp ग्रुप में भेजिए, ख़ासकर उसे जो माता-पिता के हार्ट अटैक के बाद भी कहता है “मेरी रिपोर्ट तो ठीक है”।
- सीरीज़ के और सेशन: Dil Ke Doubts World Heart Month 2026। पिछला लेख भी पढ़ें: गैस है या हार्ट अटैक?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
यह लिपोप्रोटीन(a) को नापता है, जो ज़्यादातर जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल पार्टिकल है और कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, स्ट्रोक और एऑर्टिक वाल्व की बीमारी से जुड़ा है। आम तौर पर इसे रूटीन लिपिड प्रोफ़ाइल से अलग लिखवाना पड़ता है।
डॉ. राजीव गर्ग के अनुसार हर किसी को नहीं। यह उन लोगों में करवाना चाहिए जिन्हें कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ का ज़्यादा ख़तरा है या जिनके परिवार में इसका मज़बूत इतिहास है।
क्योंकि यह जेनेटिक है और कोई लाइफ़स्टाइल कारण इसे नहीं बढ़ाता, इसलिए इसे अक्सर एक बार का टेस्ट माना जाता है, जब तक डॉक्टर कुछ और न कहें।
हाँ। डॉ. गर्ग ने कहा कि LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स नॉर्मल होते हुए भी Lp(a) ऊँचा हो सकता है।
डॉ. गर्ग ने कहा हाँ, परिवार की तस्वीर समझने के लिए बच्चों की जाँच करवाई जा सकती है, क्योंकि ऊँचा Lp(a) जेनेटिक रूप से आगे जाता है।
इस सेशन में उन्होंने कहा कि आम दवाओं से Lp(a) ख़ास नहीं बदलता, और स्टैटिन इसे लगभग 5–20% बढ़ा भी सकते हैं। दिल के कुल रिस्क के लिए लाइफ़स्टाइल फिर भी ज़रूरी है। नई दवाइयाँ अभी रिसर्च के स्तर पर बताई गईं। कार्डियोलॉजिस्ट से पूछे बिना कोई दवा न बदलें।
पूरा सेशन देखें
डॉ. गर्ग की बात उन्हीं से सुनना चाहते हैं? Dil Ke Doubts का पूरा सेशन नीचे है। Lp(a) पर उनके जवाब लगभग 27:30 से शुरू होते हैं।
▶️ पूरा सेशन देखें: Cholesterol, Triglycerides and Lp(a) · YouTube @hearthealthindia पर Subscribe करें।
डॉ. गर्ग के शब्दों में: यह टेस्ट हर किसी के लिए ज़रूरी नहीं। यह उन मरीज़ों में करवाना चाहिए जिन्हें कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ का ज़्यादा ख़तरा है, या जिनके परिवार में कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ का मज़बूत इतिहास है… Lp(a) का कोई कारक (causative factor) नहीं है। इसीलिए कहा जाता है कि इसे ज़िंदगी में सिर्फ़ एक बार करवाना चाहिए।
ऑफ़िशियल सोर्स (और पढ़ने के लिए)
ये लिंक Lp(a) और कोलेस्ट्रॉल की आम जानकारी (general education) के लिए हैं। ये सेशन में डॉ. गर्ग की बात की जगह नहीं लेते, और पर्सनल डायग्नोसिस नहीं हैं।
- MedlinePlus — Lipoprotein (a) blood test
- NHLBI (NIH) — Blood cholesterol
- WHO — Cardiovascular diseases (CVDs) fact sheet
- European Society of Cardiology — Guidelines hub
- Cardiological Society of India
इस लेख के बारे में
डिस्क्लेमर: इस लेख की मेडिकल जानकारी केवल सेशन स्पीकर डॉ. राजीव गर्ग के विचारों पर आधारित है। यह सिर्फ़ जानकारी और जागरूकता (education) के लिए है, मेडिकल सलाह नहीं। अपनी कंडीशन के हिसाब से सलाह के लिए अपने कार्डियोलॉजिस्ट से मिलें। इमरजेंसी में तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएँ। देखें: मेडिकल डिस्क्लेमर।
आप अकेले नहीं हैं
Heart Health India मरीज़ों, परिवारों और देखभाल करने वालों का समुदाय है, जहाँ हम भारत के कार्डियोलॉजिस्ट्स के साथ मिल कर अपने दिल का ख़याल रखना सीखते हैं। अगर परिवार में दिल की बीमारी है, तो अपने सवाल पूछिए, अपनी बात कहिए, और उन लोगों से सुनिए जो इस राह से गुज़र चुके हैं, हमारे Nutrition & Cholesterol ग्रुप में भी।


